भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति ।

भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति ।                                            अथवा विभिन्न कालों में भारतीय स्त्रियों की सामाजिक प्रस्थिति ।               … Read more

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19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों

19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों का उल्लेख करें                                   अथवा ‘स्त्री अधिकार’ तथा ‘नारीवाद’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।  स्त्री अधिकार(Women’s Rights) सन् 1815 ई० से … Read more

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टावनी ने सामाजिक लोकतंत्र की जो रूपरेखा प्रस्तुत की है, उसकी व्याख्या कीजिए ।

टावनी ने सामाजिक लोकतंत्र की जो रूपरेखा प्रस्तुत की है, उसकी व्याख्या कीजिए ।                                                    अथवा क्या आप टावनी के इस … Read more

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सामाजिक लोकतंत्र पर टाॅनी गौसलैंड के विचार।

सामाजिक लोकतंत्र पर गोसलैंड के विचार(Ideas of Gosland on Social Democracy) टाॅनी गोसलैंड ने अपनी पुस्तक “समाजवाद का भविष्य” मैं प्रतिनिधि लोकतंत्र की समस्याओं का उल्लेख किया है। उसका कहना है कि “केवल ऐसा नहीं है कि विभिन्न समूहों का ही समाज में विकास होता … Read more

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आधुनिक पूर्वी यूरोप में स्वातंत्र्यवाद की स्थापना का वर्णन कीजिए।

आधुनिक पूर्वी यूरोप में स्वातंत्र्यवाद की स्थापना का वर्णन कीजिए। प्रस्तावना  (Introduction) द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात पूर्वी यूरोप के अनेक देशों की स्वतंत्रता का अपहरण हो गया था तथा उन पर साम्यवादी तानाशाही आरोपित कर दी गई थी । किंतु बीसवीं शताब्दी के अंतिम … Read more

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विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताओं का वर्णन कीजिए। तथा स्वतंत्रताओं की क्या मर्यादाएं हैं ? ये मर्यादाएं क्यों आवश्यक हैं।

विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताओं का वर्णन कीजिए। तथा स्वतंत्रताओं की क्या मर्यादाएं हैं ? ये मर्यादाएं क्यों आवश्यक हैं। प्रस्तावना(Introduction) राजनीतिशास्त्र के विचारकों ने स्वतंत्रता के अनेक रूपों का प्रतिपादन किया है। मोंटेस्क्यू (Montesquieu) का कथन है कि स्वतंत्रता शब्द के अतिरिक्त और कोई दूसरा … Read more

स्वातंत्र्यकरण से क्या तात्पर्य है ? स्वतंत्रता का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसके पक्ष बताइए।

                                       स्वातंत्र्यकरण
                                    (Liberalization)
स्वातंत्र्यकरण ‘Liberalization’ का हिंदी रूप है । स्वातंत्र्यकरण को स्वतंत्रता की प्राप्ति व उसे अक्षुण्ण रखने की प्रक्रिया कहकर परिभाषित किया जाता है ।
स्वतंत्रता का अर्थ (Meaning of Liberty)- स्वतंत्रता मनुष्य जीवन की नैसर्गिक भावना है । मनुष्य में जन्म से ही स्वतंत्रता की प्रवृत्ति पाई जाती है । “मनुष्य जन्म से ही स्वतंत्रता उत्पन्न होता है ।”
‘स्वतंत्रता’ शब्द का प्रयोग विभिन्न रूपों में किया गया है तथा इसके भिन्न-भिन्न अभिप्राय हैं । स्वतंत्रता के संबंध में अनेक भ्रांतिपूर्ण धारणाएं प्रचलित हैं । उदाहरण के लिए, एक साधारण मनुष्य स्वतंत्रता शब्द का अर्थ कुछ कार्य शक्ति समझता है । लिवर (Lieber) के मतानुसार, “स्वतंत्रता शब्द का अर्थ है ‘इच्छा करने तथा कार्य की शक्ति, जो इच्छा बिना किसी आंतरिक या बाह्म प्रभाव के ही है । ”
इसका अभिप्राय यह है कि समाज में रहते हुए व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए ।

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यह कहना कहां तक सत्य है कि कानून स्वतंत्रता का रक्षक है।

प्रस्तावना(Introduction) स्वतंत्रता और कानून के मध्य पारस्परिक संबंध पर्याप्त वाद-विवाद का विषय रहा है। राज्य का आदेश व्यक्ति के व्यक्तित्व के स्वतंत्र विकास में बाधक है या साधक, इसके संबंध में दो भिन्न मत हैं –   प्रथम मत : स्वतंत्रता तथा कानून परस्पर विरोधी … Read more

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ऐतिहासिक भौतिकवाद की विवेचना करते हुए कार्ल मार्क्स के आर्थिक नियतिवाद का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

मार्क्स के इतिहास की आर्थिक व्याख्या के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए । अथवा ऐतिहासिक भौतिकवाद की विवेचना करते हुए कार्ल मार्क्स के आर्थिक नियतिवाद का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए । मार्क्स का इतिहास की आर्थिक व्याख्या का सिद्धांत (Marx’s Theory of Economic Interpretation of History) मार्क्स … Read more

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