स्वातंत्र्यकरण से क्या तात्पर्य है ? स्वतंत्रता का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसके पक्ष बताइए।

                                       स्वातंत्र्यकरण
                                    (Liberalization)
स्वातंत्र्यकरण ‘Liberalization’ का हिंदी रूप है । स्वातंत्र्यकरण को स्वतंत्रता की प्राप्ति व उसे अक्षुण्ण रखने की प्रक्रिया कहकर परिभाषित किया जाता है ।
स्वतंत्रता का अर्थ (Meaning of Liberty)- स्वतंत्रता मनुष्य जीवन की नैसर्गिक भावना है । मनुष्य में जन्म से ही स्वतंत्रता की प्रवृत्ति पाई जाती है । “मनुष्य जन्म से ही स्वतंत्रता उत्पन्न होता है ।”
‘स्वतंत्रता’ शब्द का प्रयोग विभिन्न रूपों में किया गया है तथा इसके भिन्न-भिन्न अभिप्राय हैं । स्वतंत्रता के संबंध में अनेक भ्रांतिपूर्ण धारणाएं प्रचलित हैं । उदाहरण के लिए, एक साधारण मनुष्य स्वतंत्रता शब्द का अर्थ कुछ कार्य शक्ति समझता है । लिवर (Lieber) के मतानुसार, “स्वतंत्रता शब्द का अर्थ है ‘इच्छा करने तथा कार्य की शक्ति, जो इच्छा बिना किसी आंतरिक या बाह्म प्रभाव के ही है । ”
इसका अभिप्राय यह है कि समाज में रहते हुए व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए ।

Read more

Categories PG

यह कहना कहां तक सत्य है कि कानून स्वतंत्रता का रक्षक है।

                                प्रस्तावना                             (Introduction) स्वतंत्रता और कानून के मध्य पारस्परिक संबंध पर्याप्त वाद-विवाद का विषय रहा है। … Read more

Categories PG

ऐतिहासिक भौतिकवाद की विवेचना करते हुए कार्ल मार्क्स के आर्थिक नियतिवाद का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

मार्क्स के इतिहास की आर्थिक व्याख्या के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए । अथवा ऐतिहासिक भौतिकवाद की विवेचना करते हुए कार्ल मार्क्स के आर्थिक नियतिवाद का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए । मार्क्स का इतिहास की आर्थिक व्याख्या का सिद्धांत (Marx’s Theory of Economic Interpretation of History) मार्क्स … Read more

Categories PG

राज्य और समाज के संबंध में मार्क्स के सिद्धांत का वर्णन कीजिए ।

राज्य और समाज के संबंध में मार्क्स के सिद्धांत का वर्णन कीजिए । अथवा मार्क्स के ‘समाजवादी राज्य’ तथा ‘साम्यवादी समाज’ विषय विचारों पर प्रकाश डालें । अथवा “राज्य पूंजीपति वर्ग की कार्यकारिणी समिति है ।” मार्क्स के इस कथन की व्याख्या कीजिए । राज्य … Read more

Categories PG

मार्क्स वैज्ञानिक समाजवाद का जनक है । इस कथन की आलोचनाएं ।

“मार्क्स वैज्ञानिक समाजवाद का जनक है ।” इस कथन की आलोचनाएं । मार्क्स वैज्ञानिक समाजवाद का जनक है (Marx is tha Father of Scientific Socialism) मार्क्स के वैज्ञानिक समाजवाद का अर्थ है (Meaning of the Scientific Materialism of Marx) –  मार्क्स से पूर्व बहुत से … Read more

Categories PG

मार्क्सवाद की आलोचनात्मक विवेचना की मूल्यांकन

मार्क्सवाद की आलोचनात्मक विवेचना की मूल्यांकन। मार्क्सवाद का आलोचनात्मक विवेचन (Critical Evaluation of Karl Marx) कार्ल मार्क्स एक साम्यवादी नेता था । उसने अपने विचारों को अध्यात्मवाद, द्वन्द्ववाद, भौतिकवाद, इतिहास की आर्थिक व्याख्या, वर्ग संघर्ष, अतिरिक्त मूल्य आदि सिद्धांतों के रूप में व्यक्त किया है … Read more

Categories PG

मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य सिद्धांत की आलोचना।

मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य सिद्धांत की आलोचना। मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत (Marxian Theory of Surplus Value) सिद्धांत की व्याख्या (Theory Explained) – इस सिद्धांत में मार्क्स का उद्देश्य यह है कि पूंजीपति श्रमिक वर्ग का शोषण किस प्रकार करता है । इस सिद्धांत … Read more

Categories PG

मार्क्स के वर्ग संघर्ष सिद्धांत या समाजों का इतिहास

मार्क्स के वर्ग संघर्ष सिद्धांत या समाजों का इतिहास। वर्ग संघर्ष का सिद्धांत (Theory of the class Struggle) मार्क्स द्वारा वर्ग – संघर्ष का सिद्धांत ऐतिहासिक भौतिकवाद की उपसिद्धि है साथ ही यह अतिरिक्त मूल्य सिद्धांत के अनुकूल है । मार्क्स ने आर्थिक नियतिवाद की … Read more

Categories PG

उदारवाद के समर्थन में दिए गए प्रमुख तर्क का वर्णन ।

उदारवाद के समर्थन में दिए गए प्रमुख तर्क का वर्णन । उदारवादियों ने अपने समर्थन में प्रमुख तर्क निम्न प्रकार दिए हैं – (1) आर्थिक तर्क (The Economic Arguments) – उदारवाद का नाम ‘पूंजीवाद’ के साथ संबंध है । उदारवादी विचारों ने उत्पादन साधनों पर … Read more