स्वतंत्र भारत में स्त्रियों की स्थिति एवं विकास में उनकी भूमिका की विवेचना कीजिए तथा विकास में स्त्रियों की सहभागिता बढ़ाने हेतु उपाय या सुझाव बताइए ।

स्वतंत्र भारत में स्त्रियों की स्थिति एवं विकास में उनकी भूमिका की विवेचना कीजिए तथा विकास में स्त्रियों की सहभागिता बढ़ाने हेतु उपाय या सुझाव बताइए ।                                     … Read more

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महिला सशक्तिकरण से आप क्या समझते हैं ? भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए हैं ?

महिला सशक्तिकरण से आप क्या समझते हैं ? भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए हैं ? महिला सशक्तिकरण के अर्थ (Meaning of Women Empowerment) पुरुषों के समान महिलाओं को अधिकार प्रदान करना ही महिला सशक्तिकरण है । भारत में 2001 … Read more

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भारतीय स्त्रियों की प्रमुख समस्याएं क्या हैं ?इनके समाधान हेतु अपने सुझाव दीजिए ।

भारतीय स्त्रियों की प्रमुख समस्याएं क्या हैं ?इनके समाधान हेतु अपने सुझाव दीजिए ।                                       अथवा भारतीय समाज में स्त्रियों की विभिन्न समस्याओं की विवेचना कीजिए । … Read more

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विकासशील देशों के विकास में स्त्रियों की भूमिका ।

विकासशील देशों के विकास में स्त्रियों की भूमिका । अथवा कृषि एवं औद्योगिक विकास में महिलाओं के योगदान का विवेचना कीजिए । विकास में स्त्रियों की भूमिका (Role of Women in Development) समाज का चाहे कोई भी क्षेत्र हो स्त्रियों के योगदान की भूमिका सर्वत्र … Read more

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भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति ।

भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति ।                                            अथवा विभिन्न कालों में भारतीय स्त्रियों की सामाजिक प्रस्थिति ।               … Read more

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19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों

19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों का उल्लेख करें अथवा ‘स्त्री अधिकार’ तथा ‘नारीवाद’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।   स्त्री अधिकार                                         … Read more

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टावनी ने सामाजिक लोकतंत्र की जो रूपरेखा प्रस्तुत की है, उसकी व्याख्या कीजिए ।

टावनी ने सामाजिक लोकतंत्र की जो रूपरेखा प्रस्तुत की है, उसकी व्याख्या कीजिए ।                                                    अथवा क्या आप टावनी के इस … Read more

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सामाजिक लोकतंत्र पर टाॅनी गौसलैंड के विचार ।


                                                    सामाजिक लोकतंत्र पर गोसलैंड के विचार
                                                 (Ideas of Gosland on Social Democracy)
टाॅनी गोसलैंड ने अपनी पुस्तक “समाजवाद का भविष्य” मैं प्रतिनिधि लोकतंत्र की समस्याओं का उल्लेख किया है । उसका कहना है कि “केवल ऐसा नहीं है कि विभिन्न समूहों का ही समाज में विकास होता है बल्कि इन समूहों से संबंधित समस्याएं और भी हैं जैसे- अवरोहण में असहिष्णुता, अत्यधिक अनुपालन और बहिष्कृत करने के लिए अपनी अंतिम शक्ति का निरंकुशता से प्रयोग करना आदि । इन समस्याओं के कारणों का उल्लेख करते हुए वह लिखता है कि पहला कारण यह है कि मतदाताओं का उद्देश्य अपने निजी हितों को प्राप्त करना होता है । इसलिए लोकतांत्रिक ढंग से निर्णय लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता समस्याओं के बारे में सोच समझकर नैतिकता या सामाजिक आवश्यकताओं के आधार पर मतदान करते हैं । दूसरा कारण यह है कि सत्ता की समानता को सुरक्षित रखने के लिए अकेला लोकतंत्र ही पर्याप्त नहीं है । जे० एस० मिल ने अपनी पुस्तक “आन लिबर्टी” में ऐसी समस्या के संबंध में लिखा है कि “स्वशासन तथा जनता की सत्ता अथवा शक्ति जैसे शब्द सच की अभिव्यक्ति नहीं करते क्योंकि जो व्यक्ति सत्ता का प्रयोग करते हैं वे सदैव वही लोग नहीं होते और आश्वासन का अर्थ स्वयं के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की सरकार नहीं होता बल्कि प्रत्येक की सबके द्वारा सरकार होता है ।”
गोसलैंड ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया परिणामों को प्रभावित करने का अवसर तो प्रदान करती है परंतु उन प्रभावों के उपयोग का नहीं । ये दोनों बातें अलग-अलग हैं । इससे निष्कर्ष निकलता है कि लोकतंत्र का विस्तार सरकार पर व्यक्तियों के नियंत्रण को बढ़ाने के बजाय कम करता है । यह एक प्रकार से विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की तुलना में धमकी के समान है । गोसलैंड का कहना है कि सामाजिक क्षेत्र में लोकतंत्र का विस्तार समाज द्वारा स्वीकार किए गए परिणामों की अभिव्यक्ति के लिए पर्याप्त नहीं है । अतः यह मानना पड़ेगा कि लोकतंत्र का विस्तार सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए अकेला पर्याप्त नहीं है । केवल उन नीतियों को लोकतांत्रिक कहा जा सकता है जो नैतिक सिद्धांतों के अनुकूल हों तथा जिनका निर्माण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के द्वारा हुआ हो ।

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विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताओं का वर्णन कीजिए । तथा स्वतंत्रताओं की क्या मर्यादाएं हैं ? ये मर्यादाएं क्यों आवश्यक हैं ।

प्रस्तावना                                                  (Introduction) राजनीतिशास्त्र के विचारकों ने स्वतंत्रता के अनेक रूपों का प्रतिपादन किया है । मोंटेस्क्यू (Montesquieu) का कथन है कि … Read more