19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों

19वीं शताब्दी में स्त्रियों की स्थिति में आए परिवर्तनों का उल्लेख करें
अथवा
‘स्त्री अधिकार’ तथा ‘नारीवाद’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।
  स्त्री अधिकार
                                                           (Women’s Rights)
सन् 1815 ई० से 1914 ई० के मध्य पश्चिमी यूरोप में उदारवाद एवं प्रजातंत्र का विकास हुआ । उदारवाद से तात्पर्य है- मर्यादित स्वतंत्रता एवं समानता । उदारवाद की शुरुआत राजनीतिक क्षेत्र में हुई किंतु शनै: शनै आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र भी इसकी परिधि में आ गए ।यूरोपीय पुनर्जागरण एवं धर्म सुधार आंदोलन ने भी उदारवाद के जन एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया । उदारवादी चेतना के परिणामस्वरुप स्त्रियों में भी जागृति आई ।
इंगलैंड- उदारवादी चेतना के कारण इंग्लैंड में निरंकुश शासन की समाप्ति हुई तथा मंत्रिमंडलीय प्रथा का विकास हुआ । विभिन्न वर्गों द्वारा स्वतंत्रता एवं समानता के आधार पर अपने अधिकारों की मांग की गई । इसी आधार पर 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण में स्त्रियों ने पुरुषों के साथ समानता की मांग आरंभ की । स्त्री शिक्षा का प्रसार भी इसी काल में हुआ । इंग्लैंड में स्त्रियों को अधिकार दिलाने के लिए इस काल में निम्नलिखित प्रयास किए गए-
(1) प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक जे० एस० मिल ने स्त्रियों को मताधिकार दिलाने के अथक प्रयास किए तथा इस संबंध में अनेक पुस्तकें लिखीं ।
(2) सन 1903 ई० में मिसेज पेंखसर्ट (Emmeline Pankhurst) ने स्त्रियों को सैनिक रूप में संगठित करना आरंभ किया ।
(3) स्त्रियों को लेकर कई सोसायटियां बनाई गई ।
(4) 1870 ई० में सर जेकाब ब्राइट ने भी स्त्रियों को मताधिकार दिलाने के लिए आवाज़ उठाई ।

प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व स्त्रियों की स्थिति- स्त्रियों का यह आंदोलन निरंतर उग्र होता चला गया । अंत में 1918 ई० में एक विधेयक पास किया गया जिसके द्वारा 30 वर्ष से अधिक आयु की स्त्रियों को मताधिकार प्रदान किया गया । किंतु 30 वर्ष की आयु-सीमा स्त्रियों में असंतोष का कारण बनी रही । अतः 1928 ई० में एक अन्य विधेयक पास किया गया जिसके द्वारा 21 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया गया ।
इंगलैंड के अतिरिक्त यूरोप के अन्य देशों में भी महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गई थीं । औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरुप स्त्रियों का जीवन के प्रति दृष्टिकोण परिवर्तित हो गया । अठारहवीं सदी के अंतिम चरण से लेकर 19 वीं सदी के मध्य तक के विचारकों एवं सुधारकों ने स्त्रियों को अधिक राजनीतिक एवं व्यावसायिक सुविधाएं दी जाने की मांग की जिससे कि वे स्वतंत्र जीवन का अनुभव कर सकें । इन सुधारकों में जाॅन स्टुअर्ट मिल एवं मेरी वुल्स्टोनक्रेफ्ट का विशेष योगदान रहा । प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व स्त्रियों को शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए तथा अनेक नवीन स्कूल व कॉलेज स्थापित किए गए । शनै: शनै: स्त्रियों को व्यापार एवं व्यवसाय के अवसर भी प्राप्त होने लगे । विवाहित स्त्रियों को यह अधिकार प्राप्त हो गया कि वे अपने स्वतंत्र व्यवसाय से संपत्ति अर्जित कर सकती थीं । इस प्रकार स्त्रियों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आए ।
प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् स्त्रियों की स्थिति- प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान लाखों पुरुषों को अपने व्यापार-व्यवसाय को छोड़कर युद्ध में सम्मिलित होना पड़ा । अतः उनके स्थान पर कारखानों, दफ्तरों, उद्योगों आदि में स्त्रियों ने जाना आरंभ किया । युद्ध क्षेत्र में घायल सैनिकों की सेवा-शुश्रूषा का कार्य भी स्त्रियों के द्वारा ही किया गया । अभी तक वे गृहस्थी के संकुचित दायरे में थीं किंतु अब घरों से बाहर आकर उन्होंने सामाजिक विकास में योगदान दिया । कार्यक्षमता के आधार पर उनके आत्म-विश्वास में वृद्धि हुई तथा उन्हें समाज में अपने महत्त्व का ज्ञान हुआ । परिणामत: स्त्रियों ने अपने राजनीतिक अधिकारों की मांग आरंभ की । इसी के परिणामस्वरुप विभिन्न देशों की स्त्रियों को मताधिकार प्राप्त हुआ । जैसा कि पूर्व वर्णन किया जा चुका है सर्वप्रथम इंग्लैंड में स्त्रियों को मताधिकार प्राप्त हुआ । तत्पश्चात् 1917 ई० में रूस तथा 1920 ई० में जर्मनी ने भी स्त्रियों को मताधिकार प्रदान किया ।

1917 ई० क्रांति के पश्चात् स्त्री अधिकार- सन् 1897 ई० की जनगणना के अनुसार रूस में 88 प्रतिशत स्त्रियां निरक्षर थी किन्तु नवंबर 1917 ई० की क्रांति के द्वारा शिक्षा को चर्च से पृथक कर दिया गया । ग्रामों व नगरों में जन-शिक्षा परिषद्, पुस्तकालय, स्कूल, कॉलेजों आदि की स्थापना की गई । प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य घोषित किया गया तथा माध्यमिक शिक्षा का भी प्रसार हो रहा था । चौथे दशक के अंत तक देश में नेरक्षरता का पूर्ण उन्मूलन हो चुका था । लेनिन की जीवन संगिनी नदेज्दा क्रुप्स्काया सत्ता आरंभ से लेकर अपने जीवन के अंतिम दिनों तक (1938 ई० तक) शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करती रहीं ।
रूस में स्टालिन ने भी स्त्रियों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए । जिसके परिणामस्वरूप आज रूस में 50 प्रतिशत चिकित्सक स्त्रियां हैं । करोड़ों स्त्रियां कारखानों में कार्य कर रही है । अनेक स्त्रियां सेना में सेनाध्यक्षों, कारखानों में फोरमैनों एवं राजदूतों व न्यायधीशों के पदों पर कार्य कर रही हैं । सरकार ने शिशुपालन शालाओं एवं सामुदायिक पाठशालाओं की भी व्यवस्था की हैं ।
इस प्रकार वर्तमान शताब्दी तक स्त्रियां पूर्णतया अधिकार संपन्न हो चुकी हैं । तथा पुरुषों के साथ समानता का स्तर प्राप्त करने के पश्चात समाज में अग्रणी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं ।

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