लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक परिस्थितियां या शर्तें

लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक शर्तें ।

लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक परिस्थितियां या शर्तें (Necessary Conditions for the Success of Democracy)

लोकतंत्रात्मक शासन ‘यथा प्रजा तथा राजा’ के सिद्धांत पर आधारित है । मानव-व्यवहार को सुधार कर ही इस शासन व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है । जिस प्रकार कुछ पौधे विशिष्ट प्रकार की जलवायु में ही विकसित होते हैं, उसी प्रकार सामाजिक तथा राजनीतिक संस्थाओं के विकास के लिए कुछ विशिष्ट परिस्थितियां आवश्यक होती हैं । लोकतंत्र भी एक विशिष्ट वातावरण में ही फलता-फूलता है ।

लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक शर्तें

म्नलिखित हैं-

(1) शिक्षित एवं जागरूक जनता (Educated and Awake Public)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि जनता शिक्षित हो । शिक्षित जनता को अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों का ज्ञान होता है । साधारण जनता में इतनी बुद्धि होनी चाहिए कि वह देश की आवश्यकताओं को समझ सके, प्रतिनिधियों का निर्वाचन कर सके तथा अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों का पालन कर सके । कहा भी गया है कि “सहत जागरूकता ही लोकतंत्र का मूल्य है ।” महात्मा गांधी के शब्दों में, “प्रजातंत्र ऐसा राज्य नहीं होता, जिसमें जनता भेड़ों के समान कार्य करे, इसमें जनता को जागरूक रहना होता है ।”

(2) राष्ट्रीय चरित्र (National Character)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि जनता चरित्रवान तथा नैतिक हो । हर्नशा के शब्दों मे, “लोकतंत्रात्मक सिद्धांत का रूप अनिवार्यत: धार्मिक होता है ।” उसमें परमार्थ तथा कर्तव्यपरायणता की भावना होनी चाहिए । जहां के नागरिकों का नैतिक स्तर उच्च नहीं होता, वहां संपूर्ण समाज में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहता है । वहां लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता । अतः लोकतंत्र की सफलता के लिए नागरिकों का चरित्रवान होना आवश्यक है ।

(3) आर्थिक समानता (Economic Equality)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि राज्य में आर्थिक समानता हो । आर्थिक समानता का तात्पर्य है कि सभी व्यक्तियों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो । धनी तथा निर्धन वर्ग के बीच खाई बहुत अधिक चौड़ी न हो । धन संबंधी असमानता को अधिकतम सीमा तक दूर किया जाना चाहिए । यदि समाज का एक वर्ग विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करता हो और दूसरा वर्ग न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति भी न कर पा रहा हो तो लोकतंत्रात्मक शासन सफल नहीं हो सकता । कोल के शब्दों में, “आर्थिक समानता के अभाव में, राजनीतिक स्वतंत्रता एक भ्रममात्र है ।” हाॅब्सन के शब्दों में, “धनिकों का धन और निर्धनों की निर्धनता लोकतंत्र को भ्रष्ट कर देती है ।”

(4) नागरिक स्वतंत्रताएं (Civil Liberties)- लोकतंत्र की सफलता के लिए परमावश्यक है कि नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता, साहित्य के प्रकाशन की स्वतंत्रता, सम्मेलन करने तथा संगठन निर्माण की स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए । जनता को सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार होना चाहिए । यह लोकतंत्र की आवश्यक शर्त है ।

(5) लिखित संविधान और प्रजातांत्रिक परंपराएं (Written Constitution and Democratic Customs)- लोकतंत्र की सफलता के लिए लिखित संविधान का होना आवश्यक है क्योंकि लिखित संविधान द्वारा जनता सरकार के रूप, अधिकार तथा कर्तव्यों का ज्ञान सरलतापूर्वक प्राप्त कर लेती है । लिखित संविधान जनता के अधिकारों का रक्षक होता है । लोकतंत्र की सफलता के लिए लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना भी आवश्यक है । उदाहरणार्थ- इंग्लैंड, अमेरिका तथा स्विट्जरलैंड में प्रजातंत्र की सफलता का श्रेय वहां की श्रेष्ठ राजनीतिक परम्पराओं को ही है ।

(6) समानता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था (Social System based on Equality)- लोकतंत्र की सफलता के लिए सामाजिक व्यवस्था न्याय और समानता पर आधारित होनी चाहिए । समाज में जन्म, जाति, लिंग, रंग, धर्म, सम्प्रदाय आदि के भेदभाव के बिना प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व को समान महत्व दिया जाना चाहिए ।

(7) स्थानीय स्वशासन (Local Self Government)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं का विकास किया जाए । स्थानीय क्षेत्रों में लोकतंत्र की स्थापना की जाए । स्थानीय संस्थाएं लोकतंत्र का सच्चा प्रतिबिंब होती हैं । जनता को राजनीतिक शिक्षा इन्हीं प्रारंभिक पाठशालाओं से प्राप्त होती है । ब्राइस के अनुसार, “प्रजातंत्र का सर्वश्रेष्ठ शिक्षणालय और प्रजातंत्र की सफलता की सबसे बड़े गारंटी स्थानीय स्वशासन का चलन है ‌।” स्मिथ के शब्दों में, “प्रजातंत्र के सभी रोगों का निदान अधिक प्रजातंत्र के द्वारा ही हो सकता है ।” लाॅस्की स्थानीय स्वशासन का महत्व बताते हुए कहते हैं कि राष्ट्रीय व्यवस्थापिका की सदस्यता के लिए ‘स्थानीय संस्थाओं के कार्य का अनुभव’ एक अनिवार्य योग्यता निश्चित कर दी जानी चाहिए ।

(8) समाज में एकता की भावना (Spirit of Unity in Society)- लोकतंत्रीय शासन की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि जनता में आधारभूत एकता की भावना विघमान होनी चाहिए जिससे वे पारस्परिक सहयोग के आधार पर सामुदायिक जीवन व्यतीत कर सकें । हर्नशा के शब्दों में, “एकता का दृढ़ भाव व सामुदायिक जीवन की व्यापकता लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है ।” जिस राज्य में जनता भाषागत, जातिगत और प्रान्तीय भेदों को अधिक महत्व देती है, वहां लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता ।

(9) स्वस्थ व सुदृढ़ राजनीतिक दल (Healthy and Organised Political Party)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल आर्थिक तथा राजनीतिक कार्यक्रमों पर ही आधारित होने चाहिए । इनका संगठन धर्म, जाति, भाषा या प्रांतीय भेदों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए । इसके अतिरिक्त, राजनीतिक दल अच्छे प्रकार से संगठित होने चाहिए । इंग्लैंड और अमेरिका में प्रजातंत्र की सफलता का एक बड़ा कारण उन देशों के स्वस्थ एवं सुदृढ़ राजनीतिक दल ही हैं ।

(10) बुद्धिमान और सतर्क नेतृत्व (Intelligent and Alert Leadership)- लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि नेताओं में उचित निर्णय शक्ति, साहस, अच्छी योग्यता, विशिष्ट आरंभ शक्ति व चारित्रिक गुण विघमान हों । जनता को इन नेताओं में पूर्ण विश्वास होना चाहिए तथा उसे नायक पूजा और चापलूसी से अलग रहना चाहिए । यदि राज्य की बागडोर शुध्द गुणों वाले नेताओं के हाथ में होगी तो वहां लोकतंत्र अवश्य ही सफल होगा ।

(11) न्यायप्रिय बहुमत तथा सहनशील अल्पमत (Justice Loving Majority and Tolerent Minority)- यद्यपि लोकतंत्र बहुमत का शासन ही होता है लेकिन बहुमत को मनमाना तथा निरंकुशता का व्यवहार नहीं करना चाहिए । लोकतंत्र का अर्थ बहुमत का अत्याचार नहीं है । साथ ही अल्पमत में भी सहनशीलता होनी चाहिए । उनको संविधान तथा शासन का सम्मान करना चाहिए । उनके द्वारा हिंसक क्रांतियों के स्थान पर संवैधानिक साधनों द्वारा शासन में परिवर्तन लाने के प्रयास किए जाने चाहिए ।

(12) योग्य और निष्पक्ष नागरिक सेवाएं (Able and Impartial Civil Service)- लोकतंत्र की सफलता के लिए योग्य और निष्पक्ष नागरिक सेवाएं अत्यंत आवश्यक हैं । नागरिक सेवाएं ही नीतियों को क्रियान्वित करने का कार्य करती हैं । यदि इन नागरिक सेवाओं के सदस्य योग्य, निष्पक्ष और कार्यकुशल हों तो प्रशासनिक कुशलता रहती है और श्रेष्ठ शासन सम्भव हो सकता है ।

(13) स्वतंत्र प्रेस (Independent Press)- लोकतंत्र की सफलता के लिए स्वतंत्र लोकमत के निर्माण तथा अभिव्यक्ति में प्रेस अर्थात् समाचार-पत्र बहुत अधिक महत्वपूर्ण हैं । इसके लिए समाचार-पत्र; योग्य, निष्पक्ष तथा स्वतंत्र हाथों में निहित होने चाहिए तथा उन पर शासन, किसी वर्ग विशेष या किसी दल विशेष का नियंत्रण नहीं होना चाहिए ।

(14) विश्व शांति की स्थापना (Establishment of World Peace)- लोकतंत्र की सफलता के लिए विश्वशांति की स्थापना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि युद्ध के समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़कर स्वच्छाचारिता की प्रवृत्ति अपना ली जाती है ।
इस प्रकार स्पष्ट हो जाता है कि लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए उपर्युक्त शर्तें आवश्यक हैं । यदि उपर्युक्त परिस्थितियां किसी देश में विघमान हैं तो लोकतंत्र की सफलता में कोई संदेह नहीं है । ए० एल० नावेल के शब्दों में कहा जा सकता है कि “यदि उपर्युक्त बात पूरी हो जाती है तो प्रचण्ड वायु के झोंके भी लोकतंत्र की नींव हिला नहीं पाएंगे किन्तु यदि यें बातें पूरी नहीं होंगी तो लोकतंत्र के शक्तिशाली पांव कीचड़ में धंस जाएंगे ।