भारत में पर्यावरण से संबंधित समस्या का उल्लेख करते हुए यहां पर्यावरण के संवर्धन एवं प्रदूषण की रोकथाम के लिए अपनाए जा रहे प्रयासों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

“भारत में पर्यावरण से संबंधित समस्या का उल्लेख करते हुए यहां पर्यावरण के संवर्धन एवं प्रदूषण की रोकथाम के लिए अपनाए जा रहे प्रयासों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।”
                          अथवा
‘भारत में पर्यावरण संरक्षण’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

भारत में पर्यावरण की समस्या(Problem of Environment in India)
भारत एक विकासशील देश है। स्वाधीनता के बाद देश का योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक विकास करने का आयोजन किया गया। जनसंख्या वृद्धि और कृषि क्षेत्र विस्तार के कारण वनों की कटाई की गई। देश में अनेक औद्योगिक संस्थानों की स्थापना हुई। लोहा, इस्पात, सीमेंट, वस्त्र, चीनी और अनेक रासायनिक उद्योगों की स्थापना की गई है। औधोगीकरण के परिणामस्वरुप नगरीकरण में भी वृद्धि हुई है। यातायात के साधनों में भी तेजी से वृद्धि हुई जिसके कारण भूमि व वायु प्रदूषण दिन-पर-दिन बढ़ता जा रहा है और पर्यावरण संकट उत्पन्न हो रहा है।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य(Some Important Facts)
भारत में पर्यावरण के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख करना आवश्यक होगा-

1. भारत में जंगलों का तेजी से सफाया होता जा रहा है जिससे यहां पर्यावरण की समस्या विकट हो गई है । जिस रफ्तार से पेड़ कट रहे हैं उसके अनुपात में पेड़-पौधे लगाए जाने की मात्रा नगण्य ही है । हर वर्ष लगभग 10 लाख हेक्टेयर जंगल काट रहे हैं । इसमें से कुछ वनों का विनाश तो हमारी विकास योजनाएं लागू कराने में हो रहा है ।

2. भारत में वायु-प्रदूषण बढ़ता जा रहा है ।भारत के अनेक औद्योगिक नगरों, जैसे- कोलकाता, कानपुर आदि में उद्योग की चिमनियों से निकलने वाली राख और धुआं जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रहे हैं । इन उद्योगों की राख और धुएं में आर्सेनिक, कैडमियम, पारा सीमा आदि अनेक विषैले तत्व होते हैं, जो मनुष्य के फेफड़ों में टी० वी० और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी पैदा कर रहे हैं ।

3. भारत में बढ़ती हुई आबादी के कारण भी पर्यावरण का ढांचा बिगड़ता जा रहा है ।

4. भारत में लगभग 2 से 3 करोड़ हेक्टेयर भूमि को बाढ़ का खतरा बना हुआ है । प्रतिवर्ष नियमित रूप से असम में ब्रह्मपुत्र में बाढ़ आती है । इसे रोकने का कोई उपाय अभी तक नहीं किया गया है ।

5. रासायनिक खाद धरती से पोषक तत्व खींच ले रहे हैं , इससे फसलों में सूक्ष्म पौष्टिक तत्वों की लगातार कमी हो रही है ।

6. भारत में कुल उपलब्ध पानी का लगभग 70% तो प्रदूषित हो गया है । इस जल प्रदूषण से बीमारियां बढ़ रही हैं ।

7. भारत में बनने वाले बड़े एवं मंझले बांधों के कारण भी पर्यावरण संकट बढ़ गया है । भारत में नर्मदा पर बनने वाले सरदार सरोवर बांध से और इन्दिरा सागर बांध से लगभग दो लाख लोग विस्थापित होंगे । इस बांधों के बनने से वन्य-जीवन तो नष्ट होगा ही, भूमि में दलदल अधिक हो जाने से कई बीमारियां और संकट खड़े हो जाएंगे ।

भारत में पर्यावरण सुधार एवं संवर्धन के प्रयास(Efforts for Environment Reform and Development in India)
भारत में पर्यावरण सुधार एवं संवर्धन की दिशा में जो प्रयास किए गए हैं, वे निम्नलिखित हैं-

1. भारत सरकार ने पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण की नीति अपनाई है । इस नई नीति के तहत वनों का व्यावहारिक आधार पर अर्थात् सुरक्षित वन, राष्ट्रीय वन तथा ग्रामीण वन के रूप में वर्गीकरण करके उन्हें सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है । इसमें वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाई गई है । वनों के रख-रखाव की समुचित व्यवस्था की गई है ।

2. भारत में सामाजिक वानिकी कार्यक्रम के तहत राज्यों को अच्छा प्रोत्साहन मिला है । लगभग 25 वर्षों में 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़-पौधे लगाए गए हैं ।

3. भारत में पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत हरियाली विकास का कार्यक्रम भी लागू किया गया है लेकिन भारत में यह प्रयास अत्यंत निम्न स्तर पर है ।

4. भारत में पर्यावरण से संबंधित हर पहलू पर शोध को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है । दो विशिष्ट समितियां बनी हैं, एक मानव एवं जैवकीयगोल (Biosphere) से संबंधित समिति है- इंडियन मैन एंड बायोस्फीअर कमेटी, दूसरी है- पर्यावरण शोध समिति । इसी के साथ शिक्षा, जागरूकता एवं जानकारी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।

5. भारत में ‘जल प्रदूषण’ की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए एक केंद्रीय मंडल बनाया गया है । इस संबंध में कई अधिनियम भी बने हैं जैसे जल प्रदूषण (1974), वायु-प्रदूषण (1981) । मई 1986 में पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम भी पारित हुआ है । शासन ने 1985 में केंद्रीय गंगा प्राधिकरण (Central Ganga Authority) की भी स्थापना की है । गंगा नदी के प्रदूषण के अध्ययन एवं निराकरण के लिए प्रस्तावित इस प्राधिकरण के लिए सातवीं योजना (1985-90) में लगभग 27 बड़े शहरों के लिए (3 राज्यों के लिए) 240 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था । अन्य नदियों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था की जा रही है ।

6. खदानों के कारण भी भूमि-प्रदूषण निर्मित होता है और भारत में खदानों के कार्य पर भी प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ।

उपरोक्त प्रयासों के अलावा भारत अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण के क्षेत्र में भी सहयोग दे रहा है । संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न पर्यावरण कार्यक्रमों-(UNEP), (SACEP), (IUCN), (IMDN) में भारत में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । विश्व बैंक एवं अन्य आर्थिक
संगठनों के सहयोग से कोई 15 ‘सामाजिक वानिकी’ के प्रकल्प भारत में चल रहे हैं ।
देश के सभी भागों में भूमि, जल, वन और वन्य जीवन की सुरक्षा के लिए वैधानिक उपायों के साथ-साथ ऐसे भी उपाय किए गए जो लोगों में पर्यावरण, सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति सजगता के भाव जागृत कर सकें । सुंदर लाल बहुगुणा का ‘चिपको आंदोलन’ पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति भारतीय जनमानस में नव जागृति उत्पन्न करने में सहायक सिद्ध हुआ है । देश में संचार माध्यमों से विशेष रूप से दूरदर्शन के द्वारा भी पर्यावरण कार्यक्रम का प्रचार करके जनता में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा की जा रही है । यद्यपि अभी भारत में पर्यावरण, वन्य-जीवन, वन आदि की समस्याएं काफी गंभीर है फिर भी स्पष्ट संकेत है कि इस दिशा में आने वाले समय में और भी अधिक उपलब्यां हम प्राप्त कर पाएंगे ।
पर्यावरण प्रकृति की महान देन है । प्रकृति हमें वह सब कुछ देती है जिसकी हमें आवश्यकता है- केवल मानव ही नहीं बल्कि पेड़-पौधे और जीव-जंतु भी मानव के साथ इस पृथ्वी पर रहते हैं, जो अपने अस्तित्व केलिए प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर है, इसलिए हमें इनकी क्षति, प्रदूषण तथा शोषण से अवश्य रक्षा करनी होगी, क्योंकि यदि हम पृथ्वी को ही नष्ट कर डालेंगे तब हम भी कहां बचेंगे ?
पर्यावरण संरक्षण समाज के हर व्यक्ति का सामाजिक दायित्व है । व्यक्तिगत स्तर से ही पर्यावरण-संरक्षण आवश्यक है ।

 

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