उदारवाद के समर्थन में दिए गए प्रमुख तर्क का वर्णन ।

उदारवाद के समर्थन में दिए गए प्रमुख तर्क का वर्णन ।

उदारवादियों ने अपने समर्थन में प्रमुख तर्क निम्न प्रकार दिए हैं –
(1) आर्थिक तर्क (The Economic Arguments) – उदारवाद का नाम ‘पूंजीवाद’ के साथ संबंध है । उदारवादी विचारों ने उत्पादन साधनों पर राज्य के स्वामित्व का विरोध किया । आर्थिक क्षेत्र में प्रतियोगिता के समर्थन में उन्होंने निम्नलिखित तर्क दिए हैं –
* निजी संपत्ति प्रेरणादायक – निजी संपत्ति की प्रेरणा से मनुष्य अधिक से अधिक व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ राष्ट्र की संपदा में भी अभिवृद्धि होती है ।
सभी क्षेत्रों में व्यक्ति को स्वाधीन बनाए रखने के लिए आवश्यक है उत्पादन के साधनों पर राज्य का एकाधिकार न हो । यदि समस्त पूंजी राज्य की पूंजी बन जाए तो प्रत्येक व्यक्ति राज्य का ही कर्मचारी होगा । उसकी स्वाधीनता कायम नहीं रहेगा ।
जब राज्य बहुधंधी बन जाता है तो शासन की कुशलता का ह्रास हो जाता है । अतः राज्य के ऊपर केवल उतना ही कार्यभार होना चाहिए जितना सरल से उठा सके ।

(2) प्राणीशास्त्री अथवा वैज्ञानिक तर्क (Biological or Scientific Arguments) – विद्वानों के अनुसार ‘विकासवादी सिद्धांत’ उपयुक्त है । प्रकृति में एक ऐसा संघर्ष चलता रहता है जिसमें कमजोर प्राणी नष्ट हो रहे हैं और सबल जीवित रहते हैं जैसे – प्रकृति का यह नियम है कि मिट्टी नष्ट हो और मिट्टी खाकर वृक्ष तथा वनस्पति बढ़े । जीव – जंतु वनस्पति से अधिक बलवान है, वे वनस्पति को खा जाते हैं । मनुष्य सर्वश्रेष्ठ और ‘योग्यतम जीव’ है, वह सभी प्राणियों का उपयोग का उपयोग कर आगे बढ़ता जाता है । इस प्रकार मनुष्यों में जो श्रेष्ठ है, वे जीवन की दौड़ में आगे बढ़ सकेंगे और शेष बिछड़ जाएंगे । अतः समाज या राज्य के लिए आवश्यक नहीं कि वह शक्तिहीन दुर्बलों की रक्षा करे ।

(3) व्यावहारिक कठिनाइयों के आधार पर तर्क (Arguments Based on Practical Difficulties) – राज्य की शक्ति और उसके सामर्थ्य की कुछ व्यावहारिक सीमाएं हैं । राज्य हर कार्य कुशलतापूर्वक संपन्न नहीं करता जितने परिश्रम से उद्योगपति अपने व्यवसाय का संचालन करते हैं, उतना परिश्रम सरकारी प्रबंधकों या कर्मचारियों में दृष्टिगोचर नहीं होता।

(4) नैतिक तर्क (Ethical Argument) – जाॅन स्टुअर्ट मिल, टाॅकविले और हम्बोल्ट ने नैतिक अथवा दार्शनिक आधार पर उदारवाद का समर्थन किया । नागरिकों के व्यक्तित्व के विकास के लिए उन्हें अत्यधिक सरकारी नियंत्रण में न रखा जाए । मानव के शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक गुणों का विकास स्वतंत्रता के वातावरण में हो सकता है । परिवार, शिक्षा, कला, विज्ञान, धर्म, संस्कृति और नैतिकता आदि क्षेत्रों में व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान जाता है । विद्वानों ने विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र, मताधिकार और संसदीय संस्थाओं की स्थापना को प्रमुख महत्व दिया ।

(5) ऐतिहासिक तर्क (Histori cal Argument) – इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब जब राज्य ने अधिक नियंत्रण लगाया राज्य रहा । यदि मजदूरी की दर, उत्पादन की मात्रा, वस्तुओं के मूल्य, मदनिषेध, विचारों की अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध और नियंत्रण लगाए जाएं तो कार्य आज खुले रुप में हो रहे हैं, वे छिप कर किए तो उनका अंत नहीं होगा ।