उदारवाद की प्रमुख मान्यताएं

उदारवाद की प्रमुख मान्यताएं क्या है।

उदारवाद की प्रमुख मान्यताएं निम्न प्रकार है-

(1) नागरिक स्वतंत्रताओं की संस्थापना- नागरिक स्वतंत्रताओं कि शासकगण मुक्त न होकर संविधान की शर्तों से बंधे हुए हैं।वे स्वेच्छाचारी व्यवहार नहीं कर सकते । कानून के सामने सब व्यक्ति धनी-निर्धन, अधिकारी- सामान्य नागरिक, प्रशासक- प्रशासित जन एक समान हैं। न्यायाधीश निष्पक्षतापूर्वक अदालतें कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त रहें। विचार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध न लगाए जाएं। नागरिक स्वतंत्रता के अंतर्गत धर्म पालन का अधिकार और परिवारिक स्वतंत्रताए सम्मिलित हैं। परिवारिक स्वतंत्रता’ निम्न प्रकार है-
(क) स्त्री व पुरुष दोनों के समान अधिकार है,
(ख) स्त्रियों को परिवारिक संपत्ति का अधिकारी माना जाए,
(ग) बच्चों की शिक्षा या पालन- पोषण के संबंध में अंतिम निर्णय बच्चों के माता-पिता ही करें।

(2)राजनीतिक स्वतंत्रता तथा लौकिक संप्रभुता(Political Liberty and Popular Sovereignty)- उदारवादी लेखकों के अनुसार उदारवाद लोकतंत्र का रूप है। नागरिकों के शासन के कार्यों में भाग लेने तथा सरकार को आलोचना करने का अधिकार है। वे वयस्क मताधिकार के समर्थक हैं। ‘लौकिक संप्रभुता’ के सिद्धांत की मान्यता है जनता को अपने मत की अभिव्यक्ति के अवसर मिलने चाहिए। तथा थोड़ी-थोड़ी अवधि के बाद चुनाव होते रहने चाहिए। चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए।

(3) प्राकृतिक अधिकारों का सिद्धांत ( Doctrine of Natural Right) – राजनीतिक और नागरिक स्वतंत्रताए मनुष्यों के जन्म- सिद्ध अधिकार हैं। नागरिकों को जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। जेफरसन ने कहा है कि, ”जिस परमात्मा ने हमें उत्पन्न किया, उसी ने हमें स्वतंत्रता प्रदान की।”

(4) आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Liberty) – उदारवादी विचारक उत्पादन वितरण के सभी साधनों को राष्ट्रीयकरण किए जाने का समर्थन नहीं करते। लोगों को ‘आर्थिक समझौते’ करने का अधिकार दिया जाए। निजी संपत्ति को राज्य मान्यता दे। इससे व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ होगा। मनुष्य केवल ऐसे काम करेंगे और उन वस्तुओं में अपना धन और पूंजी लगाएंगे जिनमें उन्हें अधिक लाभ प्राप्त होगा। परिश्रम और बुद्धिमान व्यक्तियों को उनके श्रम का उचित पुरस्कार मिल सकेगा तथा आलसी लोग जीवन की दौड़ में पिछड़ जाएंगे, उनमें भी आगे बढ़ने की भावना उत्पन्न होगी।

(5) सामाजिक कल्याण( Social Welfare) – ‘खुली प्रतियोगिता’ का सिद्धांत श्रमिकों और सर्वसाधारण जनता के लिए कष्ट कारक बनता जा रहा था अतः टी० एच० ग्रीन हाॅबहाउस लास्की आदि लेखकों ने ‘सकारात्मक उदारवाद’ के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। राज्य रहन- सहन के स्तर को उठाने तथा गरीबी का उन्मूलन करने के लिए हस्तक्षेप किया। राज्य जिमींदारी प्रथा को समाप्त कर चीजों में मिलावट की रोकथाम के लिए कानून बनाएं तथा शिक्षा के प्रति और नशाबंदी के लिए करवाही करे।

(6) राष्ट्रीय स्वतंत्रता समर्थन( National Liberty supported) – प्रत्येक राष्ट्र को स्वशासन का अधिकार प्राप्त कर विश्व-शांति तथा विश्व बंधुत्व के आदर्श का प्रतिपादन किया गया। साम्राज्यवाद अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और युद्धों का कारण है। महायुद्ध वास्तव में साम्राज्यवादी नीति के परिणाम थे।

(7) स्थानीय स्वशासन(Local Self Government) – उदारवादियों ने स्थानीय स्वायत संस्थायें, पंचायत व नगर- पालिकायें गठित की जाए तथा उन्हें महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की जाए। स्थानीय संस्थाओं के द्वारा जनता अपने मामलों का स्वयं प्रबंध करके राष्ट्रीय सरकार के दायित्व को हल्का कर देती हैं।


 

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