अनुदार दल की संरचना, प्रमुख सिद्धांतों एवं नीति की विवेचना कीजिए।

अनुदार दल की संरचना, प्रमुख सिद्धांतों एवं नीति की विवेचना कीजिए।

प्रस्तावना(Introduction)

सन् 1932 के सुधार अधिनियम के पारित होने के उपरांत मतदाताओं की संख्या में आशातीत वृद्धि होने पर अनुदार दल के सदस्यों ने अपने दल के केंद्रीय संगठन की आवश्यकता अनुभव की तथा इस ओर आवश्यक कदम उठाएं ।

अनुदार दल की संरचना(Structure of Conservative Party)
अनुदार दल की संरचना निम्न प्रकार की गयी-

(1) राष्ट्रीय संगठन (National Union) – सन् 1867 में अनुदार दल के एक अखिल देशीय या राष्ट्रीय संगठन की स्थापना की गई । इसे नेशनल यूनियन ऑफ कंजरवेटिव एंड यूनियनिस्ट ऐसोसिएशन (National Union of Conservatives and Unionist Association) का नाम दिया गया ।
इस राष्ट्रीय संगठन के प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं-

A. निर्वाचन क्षेत्रों में दलीय संघ स्थापित करना,
B. दल के समस्त संगठनों के मध्य संपर्क स्थापित करना,
C. दल के केंद्रीय कार्यालय से घनिष्ठ संबंध बनाए रखना आदि ।
राष्ट्रीय संगठन का अधिवेशन वर्ष में एक बार होता है । दल के इस वार्षिक अधिवेशन में निम्न कार्य संपन्न किए जाते हैं-
(i) दल के वार्षिक क्रियाकलापों का सिंहावलोकन किया जाता है ।
(ii) आगामी वर्ष के लिए दलीय कार्यक्रम तैयार किया जाता है ।
अधिवेशन में निम्न सदस्य व प्रतिनिधि भाग लेते हैं-
(a) केंद्रीय कार्यालय के सदस्य,
(b) क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि,
(c) प्रत्येक क्षेत्रीय संगठन व केंद्रीय संगठन के निर्वाचन एजेंट आदि ।
इस प्रकार लगभग चार हजार व्यक्ति दल के वार्षिक अधिवेशन में भाग लेते हैं ।
अधिवेशन में विभिन्न समूहों के प्रतिनिधि अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं । इन प्रस्तावों पर वाद- विवाद होता है ।अनुदार दल के नेतागण प्रश्नों का उत्तर देते हैं ।
इस संबंध में यह स्मरणीय है कि अधिवेशन के इन प्रस्तावों से दल का नेता अपनी नीति के निर्माण में प्रभावित तो हो सकता है, पर ये प्रस्ताव कोई आदेश या निर्देश नहीं होते । इसी कारण ये प्रस्ताव नेतागणों पर बंधनकारी नहीं होते ।

(2) केंद्रीय परिषद (The Central Council) – राष्ट्रीय संगठन की एक प्रबंधक समिति होती है, यह केंद्रीय परिषद कहलाती है । इस केन्द्रीय परिषद में निम्न सम्मिलित होते हैं-
(i) नेता (Leader)
(ii) दल के अधिकारी (Official of the Party)
(iii) संसदीय दल (Parliamentary Party)
(iv) प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्रीय संघ से 4 प्रतिनिधि (Four Representative from each Constituency Association)
इन लोगों की संख्या लगभग 6,000 हो जाती है तथापि लगभग 3,500 व्यक्ति ही केंद्रीय परिषद में भाग लेते हैं ।
कार्य (Functions) – सैद्धांतिक रूप से केंद्रीय परिषद राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासकीय संस्था है, पर व्यवहार में अपने विशाल रूप के कारण यह कार्यपालिका दायित्वों को संपन्न करने में असमर्थ रहती है । इसका परिणाम यह होता है कि यह केवल दल के संसदीय सदस्यों तथा देश में दल के अधिकारियों के मध्य एक दो-तरफा कड़ी (A two-way link) के रूप में कार्य करती है ।
द्वितीय, यह अनुदार दलीय हितों के केंद्र के रूप में अपना महत्व सिद्ध करती है ।
तृतीय, यद्यपि यह संसदीय दल के केंद्रीय कार्यालय का नियंत्रण नहीं करती पर राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव करती हैं ।
चतुर्थ, यह कार्यकारिणी के प्रतिवेदन पर विचार करती है ।
पंचम, यह राष्ट्रीय संगठन के नियमों में संशोधन लाती है ।
(3) कार्यकारिणी समिति (The Executive Committee) – राष्ट्रीय संगठन की एक कार्यकारिणी समिति होती है । इसमें 150 सदस्य होते हैं । ये सदस्य मुख्य रूप से प्रान्तीय क्षेत्रों से आते हैं । दल के संसदीय व सार्वजनिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी अथवा प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं ।
इसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं-

1. राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए नामों का सुझाव देना ।
2. किसी क्षेत्रीय संगठन की कार्यकारिणी परिषद के द्वारा प्रेषित किसी मतभेद अथवा विवाद पर निर्णय करना ।
3. आवश्यकता अनुभव होने पर अन्य राष्ट्रीय परामर्शदात्री समितियां स्थापित करना ।
4. वार्षिक सम्मेलन तथा केंद्रीय परिषद को अपनी कार्यवाहियों की रिपोर्ट देना ।
5. केंद्रीय परिषद की बैठकों के अन्तर्काल में उनके कार्यों को संपन्न करना ।
कार्यकारिणी समिति की दो उपसमितियां भी हैं ।

(4) प्रांतीय परिषद (Area Council) – अनुदार दल प्रांतीय तथा क्षेत्रीय संगठनों के दृष्टिकोण से भी सुव्यवस्थित है । इसका संगठन निम्न प्रकार है-

(i). इंग्लैंड तथा वेल्स को दलीय संगठन के दृष्टिकोण से 12 प्रांतों (Area) में विभक्त किया गया है ।
(ii). प्रत्येक प्रांतीय संगठन का एक प्रधान होता है ।
(iii). प्रधान के अतिरिक्त अध्यक्ष, उपप्रधान, कोषाध्यक्ष आदि इसके पदाधिकारी होते हैं ।
(iv). प्रांतीय संगठन की केंद्रीय परिषद को प्रांतीय परिषद (Areas Council) कहते हैं । यह परिषद निर्वाचन क्षेत्रों व सदस्य के प्रस्तावों पर विचार करती है ।
(v). प्रांतीय संगठन का प्रधान प्रांत में निर्वाचन क्षेत्रों के संघ का नेता व प्रवक्ता होता है ।

(5) क्षेत्रीय संघ (Constituency Association) – अनुदार दल के निम्नतम स्तर पर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक क्षेत्रीय संगठन होता है । यह संगठन निर्वाचन क्षेत्रीय संघ कहलाता है ।
इस निर्वाचन क्षेत्र संघ के प्रमुख कार्य निम्न प्रकार है-

(i) अपने क्षेत्र में दल का प्रचार करना ।
(ii) निर्वाचन के समय दल के प्रत्याशी के लिए समर्थन प्राप्त करना ।
(iii) दल के केंद्रीय कार्यालय के परामर्श से संसद की सदस्यता के लिए प्रत्याशियों का चयन करना ।
अनुदार दल के सैकड़ों की संख्या में क्लब हैं ।ये क्लब जनता से संपर्क बनाए रखते हैं ।

(6) केन्द्रीय कार्यालय (Central Office) – अनुदारवादी दल का केंद्रीय कार्यलय लंदन में स्थित है ।
इसका महत्व निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(i) यह कार्यालय दल का स्थाई मुख्यालय (Permanent Head Quarter) है ।
(ii) इसकी क्रियाशीलता पर दल का संगठन तथा उन्नति पर्याप्त सीमा तक निर्भर करती है ।
(iii) यह आवश्यकतानुसार नवीन संगठन की स्थापना करता है ।
(iv) यह उन संगठनों का मार्ग निर्देशन करता है ।
(v) यह निर्वाचन क्षेत्रों में वेतनभोगी एजेंटों तथा संगठन कर्ताओं को भर्ती करता तथा उन्हें समुचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करता है ।
यह कार्यालय केंद्रीय कार्यालय नेता के नियंत्रण में होता है । इसे चलाने हेतु एक प्रधान संचालन होता है ।

(7) नेता ( The Leader) – अनुदार दाल में दल के नेता का महत्वपूर्ण स्थान है । उसे महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त होती हैं । वह किसी के प्रति उत्तरदाई नहीं होता ।
नेता का चुनाव निम्न प्रकार के द्वारा किया जाता हैं-
(a) संसदीय दल
(b) राष्ट्रीय संगठन की कार्यकारिणी समिति नेता के कार्य व दायित्व महत्वपूर्ण है-
(i). नेता दल के चेयरमैन (Chairman) का चुनाव करता है । चेयरमैन केंद्रीय कार्यालय का प्रधान होता है ।
(ii). नेता ही दल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष आदि का मनोनयन करता है ।
(iii). नेता ही दल की नीति का निर्माण व उसकी व्यवस्था करता है ।
(iv). दल चाहे सत्तारूढ़ हो अथवा विरोधी पक्ष में हो, नेता ही अपने मुख्य साथियों का चयन करता है ।
(v). दल के वार्षिक सम्मेलन के प्रस्ताव नेता के पास भेजे जाते हैं । ये प्रस्ताव सुझावात्मक होते हैं । ये उसे बाध्य नहीं कर सकते ।
(vi). नेता ही मुख्य सचेतक की नियुक्ति करता है ।
(vii). नेता द्वारा चुना गया मुख्य सचेतक संसदीय दल पर नियंत्रण करता है । इस प्रकार नेता अप्रत्यक्ष रूप से अथवा मुख्य सचेतक के माध्यम से संसदीय दल पर अपना प्रभुत्व बनाए रखता है ।
सन् 1965 से पूर्व अनुदार दल में नेता के औपचारिक चुनाव की परिपाटी नहीं थी । उस समय भूतपूर्व नेता के द्वारा मनोनीत किया गया उत्तराधिकारी ही दल का नेता हो जाता था । सन् 1963 में इस व्यवस्था में परिवर्तन आ गया । इसका कारण यह था कि मैकमिलन ने नेता पद से त्यागपत्र देते हुए डगलस होम को अपना उत्तराधिकारी चुना । उसे प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार किया गया पर होम का नेतृत्व दल के समस्त नेताओं को स्वीकार्य न हुआ । इसका परिणाम यह हुआ कि होम को 1965 में त्यागपत्र देना पड़ा । उसी समय से यह नियम अपना लिया गया कि अनुदार दर में भी श्रमिक दल के समान नेता के चुनाव की परिपाटी को अपनाया जाना चाहिए ।

(8) शोध विभाग (Research Department) – अनुदार दल का अपना एक शोध विभाग है । इसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं –
(i) शोध विभाग दल की नीतियों में सहायता प्रदान करने हेतु दीर्घकालीन शोध करता है ।
(ii) शोध विभाग दल के सदस्यों को आवश्यक सूचना तथा मार्गदर्शन प्रदान करता है ।
(iii) यह विभाग केंद्रीय कार्यालय के समस्त विभागों को सहायता प्रदान करता है ।

(9) निर्वाचन एजेंट (The Election Agents) – अनुदार दल में निर्वाचन एजेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । वे पूर्णकालिक होते हैं । उनकी नियुक्ति प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में की जाती है । उनका प्रशिक्षण केंद्रीय कार्यालय द्वारा किया जाता है ।

(10) संसदीय संगठन (Parliamentary Union) – अनुदार दल का एक संसदीय संगठन भी है । उसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं-
(i) यह संगठन संसदीय दल के उद्देश्यों की साधना करता है ।
(ii) यह दल के नेता के निर्वाचन में प्रमुख भूमिका निभाता है ।
(iii)जब दल शासक दल के रूप में होता है, तो यह संगठन जिस व्यक्ति को अपना नेता निर्वाचित करता है उसे राजा प्रधानमंत्री नियुक्त करता है ।
(iv)जब दल शासक दल के रूप में नहीं होता तो यह संगठन लोक सभा के लिए दल के नेता का चुनाव करता है ।
दल का संसदीय संगठन प्रत्येक सदन में होता है । लोकसभा में अनुदार दल के संगठन को ‘1922 की समिति’ (The Committee of 1922) का कहा जाता है ।
संसदीय संगठन तथा उसकी कार्यकारिणी समिति की प्रायः साप्ताहिक बैठकें होती हैं ।
इन बैठकों में निम्न कार्य संपन्न किए जाते हैं-
(i) इनमें व्यावसायिक समितियां अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं ।
(ii) इनमें सचेतक (Whips) आगामी सप्ताह के कार्यक्रम की घोषणा करते हैं ।
(iii) इनमें दल तथा सरकार की नीति पर विचार किया जाता है ।
दल का सचेतक सदस्यों को अनुशासन बध्द करता है ।

वर्तमान में अनुदार दल के संगठन के मुख्य अंग निम्न प्रकार हैं-
(i) निर्वाचन क्षेत्रीय संघ (The Constituency Association)
(ii) प्रांतीय परिषद (The Area Councils) (iii) राष्ट्रीय संगठन की केंद्रीय परिषद (The Central Council of the National Union)
(iv) राष्ट्रीय संगठन की कार्यकारिणी समिति (The Executive Committee of the National Union)
(v) नेता (The Leader)
(vi) केंद्रीय कार्यालय (The Central Office)
(vii)अनुदार दलीय शोध विभाग (Conservative Research Development)
(viii) वार्षिक दलीय कान्फ्रेंस The Annual Party Conference)

अनुदार दल के सिद्धांत(Principles of Conservative Party)
अनुदार दल के प्रमुख सिद्धांत निम्न प्रकार है-

1. परम्परा का समर्थन (Support of the Tradition) – अनुदार दल ब्रिटेन के परम्परागत आचार-विचार और संस्थाओं को बनाए रखने के पक्ष में है । उसका सिद्धांत है कि इसमें परिवर्तन तभी किया जाना चाहिए जबकि परिवर्तन करना आवश्यक हो जाए । यह परिवर्तन धीरे-धीरे ही किया जाना चाहिए ।

2. सामाजिक संस्थाओं का समर्थक (Supporter of Social Institutions) – अनुदार दल निजी संपत्ति, संस्थापित चर्च, राजमुकुट, साम्राज्यवाद और देश पर पूंजीपति व कुलीन वर्ग के प्रभुत्व का समर्थक है । डाॅ० फाइनर का कथन है कि “अनुदारवाद का सार उसके द्वारा समर्थित सामाजिक संस्थाओं तथा उसकी प्रगति संबंधी धाराणाओं से स्पष्ट हो जाता है । अनुदार दल जिन सामाजिक संस्थाओं का समर्थन करता है, उनमें राजमुकुट, राष्ट्रीय एकता, चर्च, एक शक्तिशाली शासक श्रेणी और व्यक्तिगत संपत्ति की राज्य के नियंत्रण से स्वतंत्रता है ।”

3. साम्राज्यवाद का समर्थक (Supporter of Imperialism) – वैदेशिक क्षेत्र में अनुदार दल ब्रिटिश अहं का समर्थक रहा है । भूतकाल में उसने ब्रिटिश साम्राज्य को बनाए रखने का प्रयास किया है ।

4. औपनिवेशक स्वतंत्रता विरोधी (Opponent of Colonial Independence) – अनुदार दल ने आयरलैंड की स्वतंत्रता का कड़ा विरोध किया तथा भारत की स्वतंत्रता का भी वह विरोधी ही रहा है ।

5. नस्लवाद (Racialism) – भूतकाल में उसने इस विश्वास को अपनाया कि अंग्रेज जाति का कर्तव्य संसार भर की पिछड़ी जातियों को सभ्य बनाना है, चाहे यह कार्य उनकी इच्छा के विरुद्ध ही क्यों न हो और चाहे इसके लिए पाशविक शक्ति का मार्ग ही क्यों न अपनाना पड़े ।

6. नौकरशाही (Bureaucracy) – अनुदार दल प्रबल नौकरशाही के पक्ष में है ।

7. लार्ड सभा का समर्थन (Support of the House of Lords) – अनुदार दल का विचार है कि लाॅर्ड सभा के संगठन में चाहे सुधार किया जाए, लेकिन वर्तमान समय की अपेक्षा उसे अधिक शक्तिशाली बनाया जाना चाहिए ।

8. अहंवादी दृष्टिकोण (Egoistic Approach) – दक्षिण रोडेशिया और आब्रजन नियमों (Immigration laws) आदि के संबंध में अपनाई गई नीति से उसके अहंवादी दृष्टिकोण का आभास मिलता है ।

9. अंतर्राष्ट्रीय जगत में इंग्लैंड की भूमिका पर बल (Emphasis on the Role of England in International Field) – अनुदार दल के अनुसार ब्रिटेन के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जानी चाहिए । रूस और अमेरिका के मध्य चलने वाले शीत-युद्ध में यह दल ब्रिटेन के दायित्व का समर्थक है । यह दाल पश्चिमी यूरोपीय राज्यों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने के पक्ष में हैं ।

10. प्रबल व दृढ़ वैदेशिक नीति का समर्थक (Supporter of Strong and Firm Foreign Policy) – अनुदारवादी दल अंतर्राष्ट्रीयकरण के प्रस्तावों में दृढ़ विश्वास नहीं रखता । वह प्रबल और दृढ़ वैदेशिक नीति का समर्थक है । उनका मत है कि शांति रक्षा के लिए ब्रिटेन को अपनी सैनिक शक्ति और शास्त्रों की प्रचुरता पर निर्भर रहना चाहिए ।
अनुदार दल की नीति : व्यवहार में (Policy of Conservative Party In Practice) – जून 1970 में पद ग्रहण के बाद अनुदार दलीय हीथ सरकार के द्वारा पश्चिमी यूरोप के राज्यों के साथ संबंध स्थापित करने की नीति अपनाई गई और इसी के अंतर्गत ब्रिटेन ने ‘यूरोपियन साझा बाजार’ (E.C.M) की सदस्यता प्राप्त की । अनुदार दलीय सरकार अमेरिका के साथ घनिष्ठ मैत्री संबंध स्थापित करने और ब्रिटेन की परमाणु शक्ति के विकास हेतु भी प्रयत्नशील रही । 30 जनवरी से 3 फरवरी 1973 की अमेरिका यात्रा में तात्कालिक प्रधानमंत्री हीथ ने इसमें आंशिक सफलता भी प्राप्त की ।

दल की नीति में परिवर्तन
(Changes In the Party Policy)
यद्यपि दक्षिण पंथी पूर्ण अपरिवर्तनवादी अथवा रूढ़िवादी हैं, किंतु अधिकांशत: अनुदार दल की नीति में परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहा है । यह परिवर्तन निम्न प्रकार है-
1. समस्त वर्गों के समर्थन हेतु प्रयास (Efforts for the Support of All Classes) – दल में सदस्यों की मान्यता यह होती जा रही है कि पूंजीवादी व्यवस्था को स्वयं को इस रूप में बदल देना चाहिए कि उसे धनियों का ही नहीं अपितु सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त हो जाए ।
2. प्रजातंत्र की रक्षा (Protection of Democracy) – उनकी इच्छा है कि प्रजातंत्र की रक्षा हो और राज्य सामाजिक सेवाओं के मार्ग पर अग्रसर होता रहे ।
3. सरकार की भूमिका (Role of the Government) – उनके अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था के पक्ष-पोषण का यह अभिप्राय नहीं है कि समस्त उद्योगों पर व्यक्तिगत अधिकार स्थापित हो जाए, अपितु यह कि सरकार उद्योगों के विकास के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रूप रखे और आवश्यकतानुसार निजी उद्योगों को प्रशुल्कों (Tariffs), आर्थिक सहायता (Subsidies) एवं बाजार संगठन (Market Organisation) द्वारा सहायता दें ।
4. संरक्षण (Protection) – राष्ट्रीय भावनाओं और उद्योगपतियों के हितों, इन दोनों से प्रभावित होकर अनुदारवादी अब बेकारी की समस्या के समाधानार्थ गृह-उद्योगों के संरक्षण को प्रोत्साहन देने लगे हैं ।
5. महत्वपूर्ण परिवर्तन (Radical Changes) – श्रमिक दल के उद्देश्यों के कारण अनुदार दल के कार्यक्रम में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन दृष्टिगोचर हुए हैं ।
(a) युवक सदस्य चाहते हैं कि इनका कार्यक्रम उतना ही प्रगतिशील और ओजस्वी (Progressive and Vigorous) बने जितना कि श्रमिक दल का है ।
(b) सन् 1947 में रूढ़िवादी दल के सम्मेलन द्वारा स्वीकृत ‘औद्योगिक प्रपत्र’ (Industrial Charter) में केंद्रीय नियोजन को देश की प्रगति के लिए आवश्यक बताया गया ।
(c) 1949 में प्रकाशित (‘The Right Road for Britain’) नामक नीति पत्र में राज्य की ओर से आवश्यक समाज सेवाओं में सभी के लिए रोजगार की व्यवस्था किए जाने पर जोर दिया गया ।
(d) दल के 1951 ई० के कार्यक्रम में ‘गृह निर्माण योजना’ अपनाने पर जोर दिया गया ।
(e) 1972 में अनुदार दलीय सरकार द्वारा अधिनियम पारित कर 80 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी व्यक्तियों के लिए पेंशन की व्यवस्था की गई हैं ।
1975 में दल की नीति में परिवर्तन (Changes In Party’s Policy in 1975) – अक्टूबर 1974 के चुनावों में अनुदार दल की पराजय के बाद दल के नेतृत्व में परिवर्तन हुआ और दल के द्वारा एडवर्ड हीथ के स्थान पर मार्ग्रेट थ्रेचर को अपना नेता चुना गया ।
अक्टूबर 1975 में आयोजित ‘ब्लेकपुल सम्मेलन’ से स्पष्ट हो गया कि श्रीमती थ्रेचर के नेतृत्व में दल ने समन्वयवादी नीति को छोड़कर स्पष्ट रूप से समाजवाद का विरोध और दक्षिण पंथ का समर्थन करने की नीति अपना ली । उन्होंने कहा कि, “ब्रिटेन के लिए समाजवाद बुरा है और हमें वर्तमान की तुलना में अधिक समाजवाद की नहीं, वरन् कम समाजवाद की आवश्यकता है……. मैं समाजवाद का विरोध करती रहूंगी । पूंजीवादी राज्य समाजवादी राज्यों की तुलना में अधिक संपन्नता और अपने नागरिकों को अधिक प्रसन्नता प्रदान करते हैं ।”
मई 1979 के आम चुनावों में श्रीमती थ्रेचर के द्वारा अनुदार दल के चुनाव अभियान का संचालन उन्हीं मुद्दों पर किया गया, जिन पर वे 1974 में दल की नेता निर्वाचित होने के बाद जोर दे रही थीं । अपने चुनाव वायदों में उन्होंने कहा कि, “दल आयकर में कटौती करके जीवन स्तर ऊंचा उठाएगा, मजदूर संघों के अधिकारों में कमी करेगा, नये उद्योग शुरू करवाएगा, जिससे कि रोजगार और धन में वृद्धि हो और आप्रवासन (Immigration) के संबंध में कठोर नीति अपनाएगा ।”
जून 1983 के आम चुनावों में अनुदार दल के द्वारा इन्हीं नीतियों को दोहराया गया और जनता ने पुन: इन नीतियों को स्वीकृति प्रदान कर दी । थ्रेचर के नेतृत्व में ब्रिटिश विदेश नीति का झुकाव अमेरिका और पश्चिमी यूरोपियन देशों की ओर रहा । विश्व जनमत के भारी दबाव के बावजूद थे थ्रेचर सरकार ने दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद बरतने वाली सरकार के विरुद्ध अनिवार्य आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग ठुकरा दी ।
अक्टूबर 1986 में संपन्न वार्षिक सम्मेलन में दल ने ‘अगले 7 वर्षों में करों में 25% की कमी, मुद्रा प्रसार को कम करने और देश के 60% उधोगों के निजीकरण का वचन दिया ।
1987 के आम चुनाव में अनुदान दल के घोषणा पत्र की प्रमुख बातें निम्न प्रकार थीं-
1. कराधान में कमी की जाएगी ।
2. सरकारी खर्चों में कटौती की जाएगी ।
3. मजदूर संघों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाएगा ।
4. सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के सफेद हाथियों को समाप्त किया जाएगा और संपत्ति कर के स्थान पर ‘Poll Tax’ लगाया जाएगा, जिसका भार अमीर-गरीब सभी पर समान रूप से पड़ेगा । वैदेशिक। क्षेत्र में अनुदार दल ने निम्नलिखित बातों पर बल दिया-

1. ब्रिटेन की आण्विक क्षमता को बनाए रखना ।
2. एकतरफा नि:शस्त्रीकरण का विरोध करना ।
3. अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की मित्रता को बनाए रखना ।
4. सोवियत संघ के प्रति सख्त नीति और राष्ट्रीय ‘अहं’ को बनाए रखना ।

सत्ता प्राप्त करने के बाद समाज को नया स्वरूप प्रदान करने की योजना के अंतर्गत थ्रेचर सरकार अंतर्राष्ट्रीयकरण की ओर बढ़ी । जल और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था निजी हाथों में देने के बाद थ्रेचर सरकार ने ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना’ का अंतर्राष्ट्रीयकरण प्रारंभ किया । वर्तमान में भी अनुदार दल की नीति यथावत् ही चल रही है ।

 

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